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गोवर्धन, मथुरा के पश्चिम में डींग राजमार्ग पर 26 किलोमीटर पर स्थित है । यहाँ ही आठ किलोमीटर लम्बा गोवर्धन पर्वत है जिसे गिरिराज भी कहते है । कहा जाता है कि भगवान् श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिन और सात रात अपनी ऊँगली पर उठाकर ब्रजवासियों की इन्द्र देवता के प्रकोप से रक्षा की थी । इसी पर्वत के साथ "मानसी गंगा" है ।  सारे  देश से परिक्रमा करने एवं मंदिरों के दर्शनार्थ श्रद्धालु यहाँ आते है । प्रत्येक पूर्णिमा को यहाँ परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओ की संख्या लाखों में हो जाती है । जो गुरु -पूर्णिमा को बढ़कर साठ लाख से ऊपर हो जाती है ।  पहले  इन श्रद्धालुओं को पेयजल, सुंदर साफ़-सुथरा परिक्रमा मार्ग, विश्राम स्थल, शौचालयों आदि का पूर्ण अभाव था। ट्रस्ट के माध्यम से इन अभावो को दूर करने का प्रयास किया गया हैं। ट्रस्ट द्वारा यहाँ किये जा रहे विकास कार्यो की सूची लम्बी है यहाँ कुछ  का उल्लेख किया जा रहा है।