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तीर्थ विकास ट्रस्ट में आपका स्वागत है

हिन्दू धर्म के प्रेरणा सूत्र एवं देश की सांस्कृतिक धरोहर हमारे तीर्थो की दुर्दशा देखकर सभी को दुःख होता है  इनके जीर्णोद्वार एवं विकास की मांग अनेक दशाब्दियों से की जा रही है किन्तु स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ । भगवान् श्री कृष्ण  की पावन भूमि श्री गोवर्धन, जहाँ देश के कोने कोने से लोग परिक्रमा के लिए आते है की स्थिति बेहद शोचनीय थी । परिक्रमा करने वालो को कोई सुविधा नहीं थी । उन्हें उबड़ खाबड़, धूल-धूसरित, कील काँटों  से युक्त, वृक्षहीन व प्रकाशहीन मार्ग  पर चलना पड़ता था । परिक्रमा मार्ग में उन्हें पीने के लिए पानी भी नहीं मिलता था । तीर्थ स्थलों के विकास एवं श्रीगोवर्धन तीर्थ के विकास को प्राथमिकता देने हेतु पूज्य संत श्रीयुत रमेश भाई ओझा जी एवं श्रीयुत स्वामी चिदानंद सरस्वती (मुनि जी) की प्रेरणा से नवम्बर 1997 में "तीर्थ विकास ट्रस्ट" की नींव डाली गयी । श्री नन्द किशोर गर्ग, श्री सुभाष अग्रवाल, श्री अशोक बंसल, श्री विनोद कुमार गुप्ता एवं श्री कैलाशचंद गुप्ता ने ट्रस्ट का पंजीकरण कराया । ट्रस्ट के ट्रस्टियॉ ने श्री गोवर्धन तीर्थ के सर्वागीर्ण विकास के कार्य करने व इसे उच्चतम  स्तर के तीर्थ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया ।

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